, Oct. 10 -- श्री चौधरी ने कहा कि महिला शिक्षकों को यथासंभव नजदीकी पंचायत और पुरुष शिक्षकों को नजदीकी प्रखंड में शिक्षण कार्य का अवसर मिल सके। इसके लिए निर्धारित नियमों और नीतियों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर कॉलेजों तक लगभग सात लाख शिक्षक बिहार के बच्चों को शिक्षित करने में योगदान दे रहे हैं। राज्य की करीब 14 करोड़ आबादी में लगभग दो करोड़ बच्चे पहली कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इतनी बड़ी आबादी और विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए शिक्षकों की उपलब्धता, गुणवत्ता और शैक्षणिक सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने के लिए ओपन यूनिवर्सिटी की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से संबंधित पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि राज्य के विद्यार्थियों को अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिले। उन्होंने कहा कि अभी बड़ी संख्या में बिहार के बच्चे बाहर जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने जा रही है,जिससे बड़ी संख्या में बिहार से बाहर पढ़ रहे बच्चे अपने राज्य में ही पढ़ाई कर सकें। उन्होंने कहा कि यदि बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालय, कॉलेज और बेहतर शैक्षणिक संस्थान विकसित किए जाएं, तो राज्य के विद्यार्थियों को अपने घर के करीब उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। सरकार दूसरे राज्यों के शैक्षणिक संस्थानों को बिहार में संस्थान स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने और आवश्यक प्रोत्साहन देने की दिशा में भी काम कर रही है।

श्री चौधरी ने कहा कि बिहार में पहले सरकार की प्राथमिकता बिजली, सड़क, पानी, खाद्यान्न और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाना था। लंबे समय तक इन सुविधाओं के अभाव के कारण विकास की गति प्रभावित हुई। छात्राओं को विद्यालय तक लाने के लिए पोशाक और साइकिल जैसी योजनाओं की जरूरत पड़ी। इन प्रयासों से बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली और आज बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालयों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार के सामने दो बड़े लक्ष्य हैं। पहला, बिहार में उद्योगों का जाल बिछाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना, जिससे राज्य के मजदूरों और युवाओं को काम के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। दूसरा, बिहार में ही अच्छे विद्यालय, कॉलेज और विश्वविद्यालय विकसित करना, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। वर्ष 2030 से पहले बिहार के युवाओं को राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस काम किए जा रहे हैं। साथ ही ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि मजदूरों को मजदूरी के लिए राज्य के बाहर जाने की विवशता न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले स्कूली बच्चों की पोशाक के लिए राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती थी, लेकिन कई बार यह राशि बच्चों की पोशाक पर खर्च नहीं कर के पिता दूसरी जगह पर खर्च कर देते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। अब जीविका दीदियों के माध्यम से लगभग एक करोड़ बच्चों के लिए पोशाक सिलवाकर सीधे उन्हें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे बच्चों को समय पर पोशाक मिलने के साथ-साथ जीविका दीदियों के लिए काम और आय के अवसर भी बढ़ेंगे।

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