, Oct. 10 -- श्री चौधरी ने कहा कि सरकार ने सेवा संकल्प और कायाकल्प अभियान के माध्यम से सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत स्कूलों की रंगाई-पुताई, मरम्मत, खराब पंखों को ठीक करने और अन्य जरूरी सुविधाओं को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक सरकारी स्कूल में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाने का प्रयास किया जाएगा। मार्च के बाद जब लोग बिहार के सरकारी विद्यालयों को देखेंगे, तो उन्हें बदली हुई तस्वीर दिखाई देगी। विद्यालयों की आधारभूत संरचना और शैक्षणिक सुविधाओं में सुधार से बच्चों को बेहतर वातावरण में पढ़ने का अवसर मिलेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक चेतना, ज्ञान और लोकतांत्रिक आंदोलनों की दृष्टि से बिहार की गौरवशाली परंपरा रही है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां बड़ा आंदोलन हुआ। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब बिहार के बच्चे शिक्षित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनेंगे। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही कल के नायक और महानायक हैं। उनके सपनों को साकार करना सरकार, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहार में 17 स्थानों पर केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने जमीन उपलब्ध कराई और उनके अनुसार, इसी वर्ष इन 17 स्थानों पर केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाई शुरू कराने की पहल हुई। उन्होंने इसे बिहार में शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये के बजट में से करीब 78 हजार करोड़ रुपये, यानी लगभग 21 प्रतिशत राशि शिक्षा विभाग पर खर्च कर रही है। इसके बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में कई आवश्यकताओं और चुनौतियों को दूर करना बाकी है। सरकार इन कमियों को दूर करने और विद्यालयों की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए लगातार काम करेगी।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े सभी लोगों से बिहार की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार के नौजवानों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और रोजगार से जोड़कर ही विकसित बिहार का सपना पूरा किया जा सकता है।

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