, Aug. 20 -- मुख्यमंत्री ने कहा कि 'सहयोग कार्यक्रम' लोगों को न्याय देने तथा पदाधिकारियों को सही रास्ता दिखाने वाला कार्यक्रम है। इसके तहत 30 दिनों के अंदर हर हाल में आवेदन का निष्पादन सुनिश्चित किया गया है। ऐसा नहीं करने वाले दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि 'सहयोग कार्यक्रम' के तहत अब तक 6 लाख 42 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 96 प्रतिशत आवेदनों का निष्पादन किया जा चुका है। अब तक 9,500 पदाधिकारियों को प्रथम नोटिस, 950 पदाधिकारियों को द्वितीय नोटिस तथा 350 पदाधिकारियों को तृतीय नोटिस जारी किया गया है।श्री चौधरी ने कहा कि बिहार में स्वयं सहायता समूहों से एक करोड़ 81 लाख जीविका दीदियां जुड़ी हैं, जिनमें 30 लाख से अधिक दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। केंद्र सरकार से आग्रह है कि विशेष अभियान चलाकर नालंदा, बक्सर, भागलपुर, मोतिहारी जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों पर जीविका दीदियों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए हाट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बिहार को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से काफी मदद मिल रही है।
इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और 'सहयोग कार्यक्रम' की प्रशंसा करते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी इसका अनुसरण करना चाहिये। उन्होंने बिहार में महिला सशक्तिकरण की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों की संख्या में जीविका दीदियों की वार्षिक आमदनी एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।
ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एच.आर.श्रीनिवास ने मुख्यमंत्री को हरितगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंटकर उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार तथा ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एच.आर. श्रीनिवास ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य व्यक्ति, वरीय अधिकारी, लाभुक एवं उनके परिजन उपस्थित थे।
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