, Oct. 30 -- मुख्यमंत्री ने गंगा के तटबंधों के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि नदी के प्रवाह और उसके प्रबंधन को वैज्ञानिक तरीके से समझना और उसके अनुरूप कार्य करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी में शामिल विशेषज्ञों को गंगा का हवाई सर्वेक्षण कराया जाए, जिससे वे नदी की वास्तविक स्थिति, प्रवाह और गाद जमाव का प्रत्यक्ष आकलन कर सकें तथा प्रभावी सुझाव दे सकें। उन्होंने कहा कि बिहार की नदियां राज्य के लिए अपार संभावनाओं का स्रोत हैं। इनके जल और गाद का समुचित प्रबंधन कर कृषि, उद्योग, आधारभूत संरचना और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य एक करोड़ लोगों के लिए रोजगार एवं नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प बिहार की नदियों को राज्य की आर्थिक समृद्धि का आधार बनाना है। जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, विशेषज्ञों के सुझाव और केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने हरित पौधा, अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने जल सुरक्षा को लेकर तैयार की गयी एक स्मारिका का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान बाढ़, जल प्रबंधन पर आधारित एक लघु फिल्म दिखायी गयी।
कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, सांसद संजय कुमार झा ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, विभिन्न क्षेत्रों से आये हुये जल विशेषज्ञ, अभियंतागण, वरीय अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित