, May 19 -- मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कार्यक्रम के स्वागत भाषण में विभाग के वरीय शिक्षक डॉ. मुकुल बिहारी वर्मा ने कहा कि गांधीजी अतीत, वर्तमान और भविष्यतीनों कालखंडों में समान रूप से प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक जीवंत दर्शन हैं, जिन्हें पूरा विश्व आदर्श पुरुष के रूप में स्वीकार करता है।
विषय प्रवेश कराते हुए पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि जिस ब्रिटिश साम्राज्य में कभी सूर्यास्त नहीं होता था, उस राज को भारत से समाप्त करने में गांधीजी की निर्णायक भूमिका रही। उन्होंने कहा कि गांधीजी के आदर्शों और विचारों पर चलकर ही विकसित भारत @2047 के नव निर्माण की मजबूत नींव रखी जा सकती है। साथ ही उन्होंने नवपीढ़ी से गांधी साहित्य को पढ़ने और आत्मसात करने का आह्वान किया।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विभागीय शिक्षक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन यह संदेश देता है कि महानता पद, शक्ति या संपत्ति से नहीं, बल्कि सत्य, त्याग, अहिंसा और मानवता के प्रति समर्पण से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि गांधीजी केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि मानवता के लिए प्रेरणास्रोत विचारधारा हैं, जिनकी प्रासंगिकता भविष्य में भी बनी रहेगी।
कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इस अवसर पर प्रो. संजय कुमार झा, प्रो. उमेश कुमार, डॉ. महेश प्रसाद सिन्हा, डॉ. आर.एन. चौरसिया, डॉ. उमाकांत पासवान, डॉ. नीतू कुमारी, डॉ. रघुवीर कुमार रंजन, डॉ. आशीष कुमार बरियार, डॉ. बिन्दु चौहान सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विभिन्न सेमेस्टरों के विद्यार्थी उपस्थित थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित