, Aug. 28 -- डॉ. आर.एन. चौरसिया ने कहा कि संस्कृत ज्ञान-विज्ञान से समृद्ध एक पवित्र भाषा है, जिसे भारत की आत्मा कहा जाता है। यह हमारी सांस्कृतिक परंपरा एवं मानवीय मूल्यों की आधारशिला है। संस्कृत केवल पूजा-पाठ अथवा मंत्रों की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान और तर्कशास्त्र का अक्षय स्रोत भी है।समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। कुमकुम कुमारी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन जिग्नेश कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन भी उन्होंने किया। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर एवं मोमेंटो प्रदान कर किया गया।
इस अवसर पर संस्कृत भाषा में निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। भाषण प्रतियोगिता में कुमकुम कुमारी ने प्रथम, मुस्कान कुमारी ने द्वितीय और रूपेश कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं निबंध प्रतियोगिता में कुमकुम कुमारी प्रथम, रूपेश कुमार द्वितीय और दयानंद कुमार तृतीय स्थान पर रहे। दोनों प्रतियोगिताओं में क्रमशः शंकर कुमार एवं खुशबू कुमारी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
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