, June 22 -- इस अवसर पर विभागीय प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों को रोजगार देने की योजना प्राचीन काल से चली आ रही है। इसमें जरूरत के अनुसार समय-समय पर बदलाव किए गए। उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम उसी का एक बदला रूप है। उन्होंने बताया कि बड़े राज्यों में बिहार ही ऐसा पहला राज्य है जहां इस अधिनियम को सबसे पहले कैबिनेट से पारित किया गया। इस पूरी योजना को ग्रामीण क्षेत्र की आधारभूत संरचना, जीविका, जल प्रबंधन और प्राकृतिक आपदा से जोड़ा गया है। सचिव पंकज कुमार ने कहा कि योजना के लागू होने के बाद गांवों में आधुनिक हॉट, बाजार बनाने के साथ-साथ इनका नेशनल नेटवर्किंग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के उत्पादों को भंडारित करने के लिए भी तकनिकी आधारित सुविधाएं लागू की जाएंगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालाय, भारत सरकार के निदेशक संजय कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लिए बिहार का विकसित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत सभी काम व्यवस्थित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार के लिए 6715 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन दिया है। यह राशि सिर्फ नौ महीने के लिए है। गांवों में ऐसा कोई काम नहीं है जो वीबी-जी राम जी में शामिल नहीं किया जा सकता। सिर्फ व्यवस्थित प्लानिंग की जरूरत है। अधिकारी योजना तैयार करें, पैसे की कमी योजना क्रियान्वयन में आड़े नहीं आएगी।
जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कई अहम कार्य किए गए। उन्होंने कहा कि अब वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को केंद्रीयकृत करने की आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए कृषि और पशु पालन आधारित उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि तैयार की जाने वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में महिलाओं और युवाओं की सहभागित जरूरी है।
कार्यक्रम में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय अंतर्गत परियोजना पदाधिकारी नबनीता दास की मुख्य उपस्थिति रही। संचालन अनुपम कुमार सिन्हा ने किया।
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