, May 4 -- डॉ. तिवारी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शोध केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान सृजन की सतत प्रक्रिया है। साथ ही उन्होंने ऐसे शोध विषयों के चयन पर जोर दिया, जिनका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े और जो स्थानीय समस्याओं के समाधान में सहायक हों।
कार्यशाला की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. दिव्या रानी हांसदा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि शोध किसी भी विषय की आत्मा है और इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती हैं।
कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने शोध से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन विभाग की संकाय सदस्य डॉ. प्रगति ने किया, जबकि अंत में डॉ. प्राची मरवाहा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यशाला में विभाग की वरिष्ठ संकाय सदस्य उषा झा, प्रीति पीटर, सुषमा गुप्ता, गैर-शैक्षणिक कर्मचारीगण एवं एम.ए. द्वितीय व चतुर्थ सेमेस्टर के लगभग 100 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित