, Sept. 22 -- पटना जू गैंडा संरक्षण और प्रजनन के क्षेत्र में देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वर्ष 1979 में पहली बार असम से गैंडे का एक जोड़ा पटना जू लाया गया था। इसके बाद 1982 में बेतिया से एक गैंडे को रेस्क्यू कर यहां लाया गया। इस तरह पटना जू में गैंडों की संख्या तीन हुई। इसके बाद यहां सफल प्रजनन कार्यक्रम शुरू हुआ और गैंडों की संख्या लगातार बढ़ती गई। अब तक पटना जू में कुल 34 गैंडे रखे गए हैं, जिनमें 25 का जन्म पटना जू में ही हुआ है। गैंडा संरक्षण और प्रजनन के क्षेत्र में पटना जू की उपलब्धि को देश-विदेश में पहचान मिली है। यहां से रांची, दिल्ली, कानपुर, हैदराबाद, मैसूर और चेन्नई सहित कई चिड़ियाघरों को एनिमल एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत गैंडे दिए गए हैं। अमेरिका के सैन डिएगो जू को भी पटना जू से गैंडा उपलब्ध कराया गया है।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक अभय कुमार ने कहा कि पटना जू में वर्ष 2019 में गैंडा संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र की स्थापना की गई। इसके बाद से यहां व्यवस्थित तरीके से राइनो ब्रीडिंग सेंटर का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पटना जू में गैंडा संरक्षण और प्रजनन का अर्जित अनुभव अब बिहार के अन्य वन क्षेत्रों में प्राकृतिक अधिवास आधारित संरक्षण को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित होगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित