, May 12 -- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग के सभागार में विज्ञान संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए विशिष्ट वक्ता डॉ. आर. एन. चौरसिया ने कहा कि पॉलीमर आधुनिक विज्ञान की महत्वपूर्ण देन है, जिसने मानव जीवन को सरल, सुविधाजनक और उन्नत बनाया है। हालांकि इसके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरणीय समस्याएं भी उत्पन्न हुई हैं।उन्होंने कहा कि पॉलीमर से निर्मित वस्तुएं हल्की, सस्ती, मजबूत एवं जंगरोधी होती हैं, जिनका उपयोग उद्योग, चिकित्सा, परिवहन, वस्त्र, फर्नीचर, खिलौने और घरेलू उपकरणों में व्यापक रूप से किया जाता है।

डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के राज्य समन्वयक मुकेश कुमार झा ने पॉलीमर के लाभ एवं हानियों पर चर्चा करते हुए कहा कि भविष्य में पॉलीमर अपशिष्ट से क्वांटम डॉट तैयार कर बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पॉलीमर आधारित वस्तुएं हल्की लेकिन मजबूत होती हैं, इसलिए वाहनों, हेलमेट, चिकित्सा उपकरणों, पाइप, पानी टंकियों एवं विद्युत उपकरणों में इसका व्यापक उपयोग हो रहा है।उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकांश कृत्रिम पॉलीमर लंबे समय तक मिट्टी और जल में बने रहते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि पॉलीमर आज हमारे दैनिक जीवन की लगभग हर वस्तु का हिस्सा बन चुका है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में इसके व्यापक उपयोग ने इसके महत्व को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं कृत्रिम दोनों प्रकार के पॉलीमर मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत पुष्प-पौधों से किया गया। स्वागत भाषण प्रो. संजय कुमार चौधरी ने दिया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिषेक राय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सोनू राम शंकर ने किया।सेमिनार में डॉ. अनिन्द्र शर्मा, डॉ. मुकेश कुमार शर्मा सहित 80 से अधिक शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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