पटना , मार्च 10 -- बढ़ते साइबर खतरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव को देखते हुये मंगलवार को 'साइबर सुरक्षा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जागरूकता कार्यशाला' का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य सदस्यों को डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और उभरती तकनीकों के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना था।
बिहार विधान परिषद में आयोजित इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग साइबर हमलों के प्रमुख लक्ष्यों में होते हैं, इसलिये उनके लिये डिजिटल सुरक्षा की समझ केवल व्यक्तिगत सुरक्षा ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के लिये भी आवश्यक है।
कार्यक्रम में चर्चा हुई कि बिहार में युवाओं के लिये साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी प्रभावी नीतियां कैसे विकसित की जा सकती हैं, जिससे उन्हें सुरक्षित डिजिटल वातावरण के साथ नई तकनीकों के अवसर मिल सकें।
तकनीकी विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की खासियत लाइव डेमोंस्ट्रेशन और साइबर ड्रिल रही, जिसमें रियल-टाइम साइबर रिस्क असेसमेंट, डिजिटल सिस्टम में संभावित खतरों की पहचान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक तथा फिशिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, उपसभापति रामबचन राय और विधान पार्षद संजीव कुमार समेत अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर दी एशिया फाउंडेशन की भारत प्रमुख नंदिता बरुआ, जन जागरण संस्थान के प्रमुख वाईके गौतम, डीपसाइट्स के सह- संस्थापक शुभम पारेख और विशिष्ट अतिथि डॉ. मनीष प्रसाद मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान विधान परिषद और विधानसभा के सदस्यों के लिये तैयार साइबर सुरक्षा मैनुअल का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया। साथ ही पहले दिन के सफल आयोजन के बाद यह तय किया गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार, 11 मार्च को भी जारी रहेगा, जिससे बिहार के जनप्रतिनिधि डिजिटल युग की चुनौतियों के प्रति और अधिक सजग और सक्षम बन सकें।
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