पटना , जुलाई 21 -- बिहार विधानसभा में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में नए कर लगाए जाने के प्रस्ताव के विरोध में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।विपक्षी सदस्य प्रस्तावित करों को वापस लेने की मांग करते हुए पूर्वाह्न सत्र के दौरान सदन के वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि नए करों से आम लोगों, विशेषकर मध्यम वर्ग तथा गरीब तबके का जीवन और अधिक कठिन हो जाएगा।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी बात पर संज्ञान लिया है, लेकिन विपक्षी सदस्य वेल में डटे रहे और शोर-शराबा जारी रखा। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने शून्यकाल की कार्यवाही शुरू कराई। कुछ देर तक नारेबाजी करने के बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौट गए।

इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विधायिका की स्वीकृति के बिना कोई भी नया कर नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी नए कर को लागू नहीं किया जा सकता। यदि सरकार कोई नया कर लागू करना चाहती है, तो उसे सदन में विधेयक लाना होगा। इसके बाद सभी सदस्य उस पर चर्चा करेंगे, अपनी राय रखेंगे और आवश्यक संशोधन भी प्रस्तावित कर सकेंगे।

श्री चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर सदन में विस्तार से चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श और संशोधनों पर विचार के बाद ही कोई विधेयक पारित किया जा सकता है। यदि सदन के सदस्य प्रस्ताव का समर्थन नहीं करते हैं, तो सदन उसे अस्वीकार भी कर सकता है।

इससे पहले भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपामाले) के विधायक संदीप सौरभ ने ग्राम पंचायत कर एवं शुल्क नियमावली, 2026 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नए कर लगाए जाने के प्रस्ताव का मुद्दा सदन में उठाया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित