, Oct. 22 -- कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में औसत कृषि जोत का आकार लगभग 0.39 हेक्टेयर है। ऐसे में किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों के माध्यम से सामूहिक रूप से एग्री-वोल्टेइक्स परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और व्यावहारिक हो सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा नीति, 2025 में एग्री-पीवी को 'कृषि के लिए सौर ऊर्जा' की श्रेणी में मान्यता दी गई है।
श्री सिन्हा ने कहा कि गया जिले के नवादा गांव में किसानों के सामूहिक स्वामित्व वाली 20 किलोवाट क्षमता की पायलट परियोजना इसका उदाहरण है। इस परियोजना के माध्यम से सिंचाई के साथ आटा चक्की का भी संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य में कृषि फीडरों के सौरीकरण का कार्य भी प्रगति पर है।
कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार की जलवायु, स्थानीय कृषि परिस्थितियों और फसल चक्र के अनुरूप पायलट परियोजनाएं विकसित कर एग्री-वोल्टेइक्स तकनीक का विस्तार किया जा सकता है। इस पूरी पहल में किसानों के हितों का संरक्षण, अतिरिक्त आय के अवसरों का सृजन, कृषि भूमि का बेहतर उपयोग और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
श्री सिन्हा ने कहा कि बिहार अपनी समृद्ध परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के सहारे कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ज्ञान, विज्ञान और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भूमि बिहार की पहचान लोकतंत्र की जननी के रूप में भी रही है।
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