, May 15 -- श्री चौधरी ने कहा कि बाढ़ के दौरान पूरी मुस्तैदी के साथ तटबंधों की पूरी लंबाई में पेट्रोलिंग की जाए तथा लगातार निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिससे किसी भी प्रकार की क्षति को समय रहते रोका जा सके। उन्होंने कहा कि तटबंधों की निगरानी अत्यंत जरूरी है और शेष बचे कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए। उन्होंने बेहतर बाढ़ प्रबंधन के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को स्थानीय लोगों एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिये।
उप मुख्यमंत्री ने संभावित सुखाड़ और खरीफ फसल की सिंचाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य की नहर प्रणालियों का अंतिम छोर तक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को आगामी खरीफ मौसम में सुचारु रूप से पानी उपलब्ध हो सके।उन्होंने निर्देश दिये कि जिन क्षेत्रों में गत वर्ष नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा था, उनकी सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य कराया जाए तथा इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए। अतिक्रमण और अन्य जटिल मामलों के समाधान के लिए जिला प्रशासन एवं मुख्यालय से समन्वय स्थापित करने का भी निर्देश दिया गया।
श्री चौधरी ने अधिकारियों से किसानों के साथ सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी लेने तथा कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं करने को कहा।
विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि बाढ़ सुरक्षा, तटबंध अनुरक्षण, कटाव निरोधी कार्यों तथा नहर प्रणालियों के पुनर्स्थापन से जुड़े सभी कार्य समय से पूर्व पूरे किए जाएं, जिससे किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
बैठक में विशेष सचिव के.डी. प्रौज्जवल, अभियंता प्रमुख वरुण कुमार, अभियंता प्रमुख ब्रजेश मोहन, अभियंता प्रमुख अनवर जमील समेत बाढ़ एवं सिंचाई प्रक्षेत्र के मुख्य अभियंता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
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