, Oct. 21 -- कृषि मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि विभाग ने 1,405.51 लाख रुपये यानी लगभग 14.06 करोड़ रुपये की राशि की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक एवं आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के अनुरूप है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की दिशा में काम किया जा रहा है।

श्री सिन्हा ने कहा कि कार्यक्रम के तहत रबी मौसम में 18,000 एकड़ और गरमा मौसम में 9,600 एकड़ में विभिन्न फसलों की खेती का प्रत्यक्षण होगा। रबी मौसम में 18,000 एकड़ में जीरो टिलेज तकनीक से गेहूं, चना और मसूर की खेती की जाएगी। इसके अलावा रेज्ड बेड तकनीक से मक्का, सरसों, अलसी, मसालों और सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। गरमा मौसम में 9,600 एकड़ में मक्का, मूंग, उड़द, मोटे अनाज, सूरजमुखी, तिल, हरी खाद के लिए ढैंचा और सब्जियों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए लीफ कलर चार्ट और नियमित मृदा परीक्षण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सभी 24 चयनित जिलों में 30-30 एकड़ क्षेत्र में सीड हब स्थापित किए जाएंगे। इस तरह कुल 720 एकड़ में बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। योजना के प्रावधानों के अनुसार, बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड उत्पादित बीजों की खरीद किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 30 प्रतिशत अधिक दर पर करेगा। इससे गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने के साथ किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

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