, Oct. 5 -- कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष, विभागीय शिक्षकों एवं विशिष्ट अतिथि पंडित संगीत मल्लिक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।इस अवसर पर पंडित रामचतुर मल्लिक के प्रपौत्र पंडित संगीत मल्लिक ने ध्रुपद गायन की मनोहारी प्रस्तुति दी। उन्होंने राग भीमपलासी में नोम-तोम के आलाप के साथ 'कासे कहूं जिया की बात' की प्रस्तुति दी। इसके बाद सूलताल में 'शंभू हर हर गंगाधर' प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में ध्रुपद की गंभीरता, शास्त्रीयता और दरभंगा घराने की विशिष्ट गायकी की झलक देखने को मिली।

इसके बाद संगीत विभाग की छात्राओं ने सहायक प्रोफेसर पुष्कर आनंद के मार्गदर्शन में राग भैरव में ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया। छात्र-छात्राओं की प्रस्तुति ने समारोह को गरिमामय बना दिया और ध्रुपद की परंपरा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के विभागीय प्रयास को रेखांकित किया।

इस मौके पर सहायक प्रोफेसर डॉ. पुष्कर कुमार झा, डॉ. अभिषेक स्मिथ, रवीन्द्र कुमार सिंह सहित विभाग के अन्य कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

समारोह के माध्यम से पद्मश्री पंडित रामचतुर मल्लिक की संगीत साधना, उनकी विरासत तथा दरभंगा घराने की ध्रुपद परंपरा में उनके अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।

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