, Sept. 5 -- संग्रहालय के विकास से विरासत संरक्षण के साथ पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। नई पीढ़ी अपनी जड़ों को जानेगी और लखीसराय को बिहार के प्रमुख विरासत केंद्र के रूप में नई पहचान मिलेगी। क्योंकि विरासत जब सुरक्षित होती है, तो इतिहास भविष्य की पहचान बन जाता है।हाल ही में जून 2026 में शहर के संसार पोखर की खोदाई के दौरान लखीसराय की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान दिलाने वाली एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज सामने आई है। करीब दो फीट ऊंची काले पत्थर की दुर्लभ प्राचीन प्रतिमा को शनिवार को वैधानिक प्रक्रिया पूरी करते हुए लखीसराय संग्रहालय में सुरक्षित रखवा दिया गया।

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