, April 7 -- कृषि मंत्री ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान मानव जीवन को सुरक्षित रखने वाली एक व्यापक और बहुआयामी पहल है, जिसकी सराहना न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत सार्वजनिक जल संरचनाओं, तालाब, पोखर, कुँआ, नदी, नाला, आहर, पाईन को अतिक्रमण मुक्त कराकर उनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसके अलावा छोटी-छोटी नदियों, नालों और पहाड़ी क्षेत्रों में जल संग्रहण के लिए चेक डेम और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। सरकारी भवनों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था, सघन वृक्षारोपन और सौर ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

श्री यादव ने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने में कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग को इस अभियान के तहत स्पष्ट दायित्व दिया गया है। कृषि विभाग की ओर से जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम, सूक्ष्म सिंचाई, जलछाजन के विकास के लिए नये जल स्रोतो के सृजन का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। साथ ही आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राकृतिक खेती, शुष्क बागवानी, संरक्षित खेती, सिंचाई कूप तथा साद अवरोधक बांध जैसे अन्य अवयव को शामिल किया जा रहा है।

कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु अनुकूल खेती के लिए सभी जिलों में कार्यक्रम चलाये जा रहे है। उन्होंने कहा कि मौसम के उपयुक्त फसल का चुनाव तथा फसल प्रभेद का चुनाव बहुत आवश्यक है, यही बात वैज्ञानिक किसानों को समझा रहें है। बाजरा, मडुआ, चीना, कोनी जैसे फसलों की खेती किसान छोड़ चुके है। बदलते मौसम में ये फसल महत्वपूर्ण विकल्प बन रहा है। बदलते मौसम के परिपेक्ष्य में खेती को नये तरीके से देखने की जरूरत है तथा नये फसल पद्धति को विकसित करना आवश्यक है।

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