, Oct. 30 -- दाखिल-खारिज के मामलों में निष्पादन और अस्वीकृति की स्थिति के साथ आवेदनों में पाई जाने वाली त्रुटियों की भी समीक्षा की गई। त्रुटियों के निराकरण और लंबित आवेदनों के नियमानुसार निष्पादन पर जोर दिया गया।परिमार्जन प्लस के लंबित आवेदनों, डिजिटाइज्ड जमाबंदी और छूटी हुई जमाबंदी से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए इनके त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया गया। भूमि अभिलेखों में त्रुटियों के सुधार और छूटे हुए अभिलेखों के अद्यतीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी बल दिया गया।बैठक में सरकारी भूमि के सत्यापन, सरकारी भूमि की जमाबंदी, अभियान बसेरा और राजस्व महा-अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त ई-मापी सेवा और ऑनलाइन राजस्व सेवाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई।

लोक शिकायतों के निष्पादन की समीक्षा करते हुए आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और सुगम सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिये गये कि वे अपने स्तर पर लंबित मामलों की नियमित निगरानी करें और निष्पादन में आने वाली बाधाओं को दूर कर निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करें।

बैठक का मुख्य उद्देश्य दो साल से अधिक समय से लंबित राजस्व मामलों के निष्पादन में तेजी लाना, सभी राजस्व न्यायालयों में डिजिटल सुनवाई को प्रभावी ढंग से लागू करना तथा आम लोगों को भूमि संबंधी विवादों के त्वरित समाधान के माध्यम से राहत उपलब्ध कराना था।

इस अवसर पर विभाग के अपर सचिव अमित कुमार पांडेय, अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल, उप निदेशक श्रीमती मोना झा, उप सचिव अविनाश कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री अनुपम प्रकाश, सहायक निदेशक सह जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, आईटी मैनेजर आनंद शंकर, प्रशाखा पदाधिकारी राजीव शंकर, दीन दयाल राम सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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