, April 12 -- गैस संकट का असर कीमतों पर भी पड़ा है। होटल संचालकों के अनुसार खाद्य पदार्थों के दाम 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। उदाहरण के तौर पर, एक स्थानीय मिठाई विक्रेता का कहना है कि जो रसगुल्ला पहले 16 रुपये में मिलता था, वह अब 20- 22 रुपये में बिक रहा है। चौक-चौराहों पर चलने वाली चाय-नाश्ते की कई दुकानें भी गैस की कमी के कारण बंद पड़ी हैं।

कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने भी गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। एक कैटरिंग व्यवसायी ने कहा, "शादी के ऑर्डर तो मिल रहे हैं, लेकिन गैस नहीं मिलने से खाना बनाने में दिक्कत हो रही है। अगर यही स्थिति रही तो कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।"कई कैटरर अब लकड़ी, कोयला जैसे वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं, जो न केवल महंगे हैं बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं।आम उपभोक्ताओं के बीच यह भी चर्चा है कि गैस की कमी का फायदा उठाकर कुछ स्थानों पर कालाबाजारी हो रही है, जिससे संकट और गहरा गया है। हालांकि, प्रशासन ने इस तरह के आरोपों की पुष्टि नहीं की है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर वैश्विक एलपीजी आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे आयात पर निर्भर क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि स्थानीय वितरण व्यवस्था में खामियां भी इस संकट को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

जिले में कुल 75 गैस वितरकों के यहां लगभग 9.63 लाख उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। बावजूद इसके, आपूर्ति और वितरण के बीच संतुलन नहीं बन पा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पिछले एक माह के दौरान दरभंगा के वितरकों को एक भी वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की गई है, जिससे होटल और कैटरिंग व्यवसाय लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

वहीं, जिला प्रशासन के दावे इससे अलग तस्वीर पेश करते हैं। जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुरेश कुमार ने बताया, रविवार को लगभग 25 हजार गैस सिलेंडरों का वितरण होने की संभावना है। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सभी एजेंसियों द्वारा होम डिलीवरी सेवा जारी है और शिकायतों के समाधान के लिए नियंत्रण कक्ष भी संचालित है। उन्होंने कहा कि विवाह समारोहों के लिए वाणिज्यिक सिलेंडर उपलब्ध कराने का प्रावधान है, जिसके तहत संबंधित कैटरर या रसोइया अनुमंडल पदाधिकारी और तेल कंपनियों में पंजीकरण कराकर सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।

इसी बीच, उप निदेशक जनसंपर्क सत्येन्द्र प्रसाद ने दावा किया, "जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। बुकिंग के एक से दो दिनों के भीतर उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराई जा रही है।"हालांकि, प्रशासन के इन दावों के विपरीत जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन में जहां 20 से 25 हजार सिलेंडर वितरण की बात कही जाती है, वहीं स्थानीय स्तर पर यह आरोप है कि संसाधनों की कमी के कारण मात्र सात से आठ हजार उपभोक्ताओं तक ही गैस पहुंच पा रही है। दिलचस्प बात यह है कि कई बार वितरकों के पास स्टॉक उपलब्ध रहने के बावजूद उपभोक्ताओं तक आपूर्ति नहीं हो पाती।

ऐसे में स्पष्ट है कि दरभंगा में एलपीजी संकट केवल आपूर्ति की कमी का मुद्दा नहीं, बल्कि वितरण प्रणाली में खामियों और प्रशासनिक दावों व वास्तविकता के बीच गहरे अंतर का भी संकेत है। विवाह सीजन के करीब आते ही यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ स्थानीय व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

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