, April 12 -- इस पंचायत में 172 स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सक्रिय हैं, जिनमें से 162 बैंक ऋण से जुड़ चुके हैं। महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प और कंप्यूटर जैसे कौशल प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। जीविका के माध्यम से एससी-एसटी की महिलाएं स्कूल ड्रेस सिलाई कर अच्छी आय कमा रही हैं। अब सैकड़ों महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो चुकी हैं और शासन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।महिलाओं की सुरक्षा के लिए शक्ति सलाह केंद्र की स्थापना की गई है। दहेज, बाल विवाह और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित मामलों को मुखिया अनुराधा देवी अपने स्तर पर या ग्राम कचहरी में सुलझाती हैं। उनका प्रयास रहता है कि मामले थाने तक न पहुंचें। मजबूत जागरूकता अभियान और कारण लिंग-आधारित हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है।
पंचायत ने दो हजार 572 शौचालयों का निर्माण करवाया है। सभी घरों तक सड़क बनाई गई है। 100 एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं और आरओ आधारित पेयजल सुविधा भी उपलब्ध है। इसके साथ ही विधवा पेंशन के 143, वृद्धावस्था पेंशन के 149 और विकलांगता पेंशन के 67 लाभार्थियों को नियमित लाभ मिल रहा है। पात्र सभी लाभार्थियों को 100 प्रतिशत कवरेज देने का लक्ष्य रखा गया है।
मुखिया ने बताया कि शुरुआत में महिलाओं की भागीदारी कम थी और सामाजिक रूढ़िवादी मानसिकता बाधा बन रही थी। नियमित जागरूकता अभियान, महिला सभाएं, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से समन्वय के माध्यम से इन चुनौतियों पर काबू पाया। आज महिलाओं की निर्णय लेने में सक्रिय भागीदारी बढ़ी है और अब वे विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर चुकी हैं।
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