पटना , अप्रैल 28 -- िहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) से जुड़ीं 'जीविका दीदी' अब सिर्फ रोजगार सृजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की मजबूत कड़ी बनकर उभर रही हैं। जीविका दीदियां घरेलू हिंसा और अन्य आपराधिक घटनाओं से पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को राहत दिलाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।हाल के दिनों में ऐसे अनगिनत मामले सामने आए जिनमें इन दीदियों ने महिलाओं को घरेलू हिंसा और दूसरे अपराध से बचाने के लिए महत्वपूर्ण काम किया।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि राज्य में करीब 11 लाख जीविका समूहों से जुड़ीं डेढ़ करोड़ से भी अधिक महिलाएं दीदी अधिकार केंद्र और दीदी का आवाज केंद्रों के माध्यम से दूसरी महिलाओं और बच्चियों को हिंसक-आपराधिक समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद कर रही हैं।
भागलपुर के कहलगांव ब्लॉक में शिव गुरु समूह से जुड़ी दीदी अधिकार केंद्र की को-ऑर्डिनेटर रूबी कुमारी ने बताया कि कुछ दिन पहले मोबाइल फोन के जिद में 11 वर्ष की बच्ची घर छोड़कर कहीं चली गई। बच्ची की मां ने मुझसे संपर्क किया और आपबीती कही। बच्ची की मां के साथ खोजबीन करने पर पता चला कि वह मालदा के लिए जाने वाली किसी ट्रेन में बैठ गई थी और वह ट्रेन रवाना भी हो गई। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ )जवान की मदद से बच्ची को मजिस्ट्रेट के पास से किसी तरह से सुरक्षित बरामद किया गया और उसके परिजनों को सौंपा गया।
समस्तीपुर के वारिसनगर में खुशबू जीविका समूह से जुड़ीं इंदू देवी का कहना है कि पिछले वर्ष उन्हें एक महिला ने बताया कि पति उसकी बेरहमी से पिटाई कर रहा है। जान बचाने के लिए वह किसी तरह घर से भाग पाईं है। श्रीमती इंदू ने महिला थाना और दीदी अधिकार केंद्र से अवगत कराते हुए पीड़ित महिला का बढ़-चढ़कर मदद कीं। समस्या के स्थाई निदान के लिए संबंधित वार्ड के पार्षद और दूसरे सामाजिक लोगों की मौजूदगी में पंचायत बुलाई गई और महिला के साथ हिंसक घटना की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में उसके पति से हलफनामा लिया गया। आज वह महिला अपने ससुराल में पति और दूसरे लोगों के साथ सकुशल जीवन व्यतीत कर रही हैं और आर्थिक मजबूती के लिए रोजगार में सहयोग भी देती हैं।
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