पटना , जून 19 -- खेलकूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों के दौरान लगने वाली घुटने की गंभीर चोटों के उपचार के क्षेत्र में बिहार ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।पटना के सिसरो अस्पताल में बिहार में पहली बार अत्याधुनिक जाइरोस ज्वेल एसीएल ग्राफ्ट तकनीक के माध्यम से एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) की सफल सर्जरी की गई है। इसे बिहार में खेल चिकित्सा और हड्डी रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
अस्पताल के वरिष्ठ आर्थ्रोस्कोपी एवं खेल चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार ने इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सर्जरी के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
डॉ. रवि कुमार ने बताया कि एसीएल घुटने के अंदर स्थित एक महत्वपूर्ण लिगामेंट है, जो घुटने को स्थिर रखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि फुटबॉल, क्रिकेट, कबड्डी और बैडमिंटन जैसे खेलों के दौरान अचानक मुड़ने, कूदने या गिरने से यह लिगामेंट क्षतिग्रस्त हो सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियां करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
डॉ. रवि कुमार ने बताया कि अब तक एसीएल सर्जरी में मरीज के शरीर से हैमस्ट्रिंग या अन्य ऊतकों को निकालकर नया लिगामेंट तैयार किया जाता था। वहींजाइरोस ज्वेल एसीएल ग्राफ्ट तकनीक में सिंथेटिक लिगामेंट का उपयोग किया जाता है, जिससे अतिरिक्त टिश्यू निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती और रिकवरी अपेक्षाकृत तेज होती है। इस तकनीक की मदद से मरीज जल्द सामान्य गतिविधियों में लौट सकता है। साथ ही शरीर की कोशिकाएं ग्राफ्ट के साथ जुड़कर प्राकृतिक ऊतक के विकास में भी सहायता करती हैं।
डॉ. रवि कुमार ने बताया खेल गतिविधि के दौरान एसीएल पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद मरीज की विस्तृत जांच की गई थी। विशेषज्ञों ने उसकी स्थिति का मूल्यांकन कर जाइरोस ज्वेल एसीएल ग्राफ्ट तकनीक से आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी करने का निर्णय लिया।
डॉ. रवि कुमार ने कहा कि बिहार में पहली बार इस तकनीक का उपयोग खेल चोटों के इलाज में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे मरीजों को बेहतर स्थिरता, तेज रिकवरी और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। हमारा उद्देश्य खिलाड़ियों और सक्रिय जीवनशैली वाले लोगों को सुरक्षित तरीके से जल्द उनकी सामान्य गतिविधियों में वापस लाना है।
वहीं अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिषेक सर्राफ ने कहा कि इस आधुनिक तकनीक के उपलब्ध होने से अब बिहार के मरीजों को अत्याधुनिक एसीएल सर्जरी और पुनर्वास के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
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