, May 12 -- 'साइबर पीस' के संस्थापक ने कहा कि राज्य समर्थित ऐसे क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की आवश्यकता है जो युवाओं को सही मार्ग दिखा सके और जिनका फोकस नैतिक तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल उद्यमिता, साइबर जागरूकता और उभरती तकनीकों के कौशल विकास पर हो। उन्होंने कहा कि बिहार में साइबर सुरक्षा और नई विकसित हो रही तकनीकों से संबंधित उत्कृष्ट केंद्र स्थापित कर राज्य को साइबर सुरक्षा, डिजिटल विश्वास और जिम्मेदार नवाचार का केंद्र बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि "ऐसे उत्कृष्ट केंद्र बिहार की छवि को साइबर अपराध हॉटस्पॉट से बदलकर साइबर क्षमता, डिजिटल भरोसे और तकनीकी मजबूती के मॉडल में बदल सकते हैं।"श्री कुमार के अनुसार इस तरह के केंद्र पटना, गया, नालंदा और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों के विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, उद्योग भागीदारों, स्टार्टअप और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से विकसित किए जा सकते हैं। इन केंद्रों में साइबर सुरक्षा अनुसंधान, एआई गवर्नेंस, डिजिटल फॉरेंसिक, एथिकल हैकिंग, साइबर सुरक्षा जागरूकता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों पर काम किया जा सकता है।
'साइबर पीस' के संस्थापक ने कहा कि बिहार के युवाओं में अपार संभावनाएं हैं और डिजिटल प्रतिभा को अपराधी नेटवर्क के हाथों में जाने देने की बजाय शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और साइबर नेतृत्व के क्षेत्रों में निवेश किया जाना चाहिए। उन्होंने बदलते साइबर खतरे से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, नीति निर्माताओं और नागरिक समाज संगठनों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को डिजिटल साक्षरता, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और सामुदायिक साइबर सुरक्षा मॉडल के जरिए "पहला रक्षक" बनाया जाना चाहिए।
श्री कुमार ने कहा कि "एआई एक दोधारी तलवार है, जो यह नवाचार को बढ़ावा देने के साथ साइबर अपराधियों को भी पहले से ज्यादा सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि सरकार, समाज और शिक्षण संस्थाओं को ऐसी फोकस और जिम्मेदार एआई से जुडी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसका उपयोग, साइबर जागरूकता और डिजिटल विश्वास को मजबूत करने के लिए हो।
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