पटना , मई 29 -- िहार में खनन बंदोबस्ती की प्रक्रिया को अधिक सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। खनन विभाग ने बिहार स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को नामित एजेंसी के रूप में अधिकृत किया है, जो बालू खनन से संबंधित सभी आवश्यक स्वीकृतियां पहले से ही प्राप्त कर लेगी।

नई व्यवस्था के तहत, जिन स्वीकृतियों को प्राप्त करने में पहले लगभग 250 से 270 दिन का समय लगता था, वह समय अब बंदोबस्तधारी के बच जाएंगे। इससे पट्टेदारों को लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी और वे टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही खनन कार्य शुरू कर सकेंगे।

पहले की व्यवस्था में पट्टा आवंटन के बाद बंदोबस्तधारी को पर्यावरणीय एवं अन्य जरूरी स्वीकृतियां स्वयं लेनी पड़ती थीं, जिससे प्रक्रिया में काफी विलंब होता था। अब नामित एजेंसी के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली जाएगी, जिससे खनन कार्य तेज और सुगम होगा।

इस संबंध में राज्य के खान-भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चन्द्रवंशी ने कहा कि इस नई व्यवस्था से विभाग को भी लाभ होगा और राजस्व में वृद्धि होगी। साथ ही, बालू की उपलब्धता बनी रहने से आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

खनन विभाग के अनुसार, बिहार स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को एजेंसी बनाए जाने से नीलामी प्रक्रिया से पहले ही सभी स्वीकृतियां पूरी कर ली जाएंगी। इससे लीज आवंटन के तुरंत बाद फर्म संचालकों को खनन कार्य शुरू करने का अवसर मिल सकेगा।

उल्लेखनीय है कि 27 मई को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में बिहार स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को खनन विभाग की नामित एजेंसी बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।

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