पटना , मार्च 19 -- बिहार में शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की उपासना का त्योहार चैत्र नवरात्र आज से शुरू हो गया।
शुभ मुहुर्त में विधि विधान से नवरात्र आराधना को लेकर कलश की स्थापना कर पूजा शुरू की गई। इसके साथ ही मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का नौ दिवसीय अनुष्ठान आज से शुरू हो गया। घरों और मंदिरों में पूजा-पाठ एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरु हो गया। चैत्र नवरात्र को लेकर सुबह होते ही लोग पूजा की तैयारी में लग गये। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान भी किया। इस व्रत को करने वाले लोगों ने घर की साफ-सफाई पूरी करने के बादकलश स्थापना की। नवरात्र के पहले दिन भगवती के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जा रही है।गंगा मिट्टी में जौ डालकर उसके ऊपर कलश स्थापना कर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देवी का आह्नान कर पूजा की गयी। मंदिरों में पुरोहित द्वारा विशेष पूजा-अर्चना कर स्तुति पाठ के बाद आरती हुई ।दुर्गा सप्तशती, कील, कवच, अर्गला, दुर्गा चालीसा, रामचरितमानस, सुंदरकांड का पाठ भी संकल्प के साथ शुरू हो गया, जो चैत्र शुक्ल महानवमी शुक्रवार 27 मार्च को हवन, पुष्पांजलि के साथ संपन्न होगा।
नवरात्र के पहले दिन ही मां शैलपुत्री की आराधना में पटना आसपास के इलाके के लोग सुबह से ही भक्ति में लीन रहे। मंदिरों तथा घरों में कलश स्थापना के साथ देवी दुर्गा की आराधना शुरू हो गई श्रद्धालु आज से अपने सामर्थ्य के अनुसार देवी की भक्ति में सराबोर हो जाएंगे। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, कलश स्थापना, वेद पाठ, आरती मंगल होंगेI घरों में भी घट स्थापना, दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ, वैदिक मंत्रो का जाप,घंटी, शंख, आरती, स्तुति की जाएगी।
आचार्य राकेश झा ने बताया कि गुरुवार को उत्तरभाद्रपद नक्षत्र एवं शुक्ल योग में चैत्र नवरात्र शुरू हुआ ।माता के उपासक नौ दिन के लिए भक्ति में लीन हो गए। गुरुवार को प्रतिपदा तिथि में कलश, गणेश-अम्बिका, नवग्रह, पंचदेव, षोडशमातृका सहित भगवती का आवाहन व विधिवत पूजन किया गया I पूजा में गंगाजल, पंचामृत, मौली, अक्षत, चंदन, फूलमाला, इत्र, धुप-दीप, नैवेद्य, पान-सुपारी अर्पित कर कर्पूर से आरती हुई । नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में प्रत्येक दिन माता के अलग-अलग रूपों की पूजा होगी।
पंडित राकेश झा ने बताया कि चैत्र नवरात्र के आठवें दिन 26 मार्च गुरुवार को आर्द्रा नक्षत्र व शोभन योग में महाष्टमी का व्रत किया जाएगा। इस दिन माता का विशेष श्रृंगार, पकवान का नैवैद्य, वस्त्र-श्रृंगार प्रसाधन अर्पित होगा।वही चैत्र शुक्ल नवमी शुक्रवार 27 मार्च को पुनर्वसु एवं पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग तथा सर्वार्थ सिद्धि योग में नव दुर्गा के नवम स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा, वेद पाठ के समापन के बाद माता के उपासक हवन, पुष्पांजलि के बाद कन्या पूजन करेंगे I इसी दिन रामनवमी का पावन पर्व भी मनाया जाएगा।
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