पटना , सितंबर 30 -- र्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, की ओर से राज्य में प्राकृतिक एवं वन क्षेत्रों के संरक्षण के साथ ईको-टूरिज्म को व्यवस्थित एवं आकर्षक स्वरूप देने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्राकृतिक स्थलों, जलाशयों, पहाड़ी क्षेत्रों एवं वन्यजीव क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए आवश्यक आधारभूत एवं जन-सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।बिहार ईको-टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी के माध्यम से ईको-टूरिज्म स्थलों के विकास के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर, आर्किटेक्ट कंसल्टेंट तथा प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट के चयन की प्रक्रिया प्रगति पर है। साथ ही, राज्य में ईको-टूरिज्म के ब्रांडिंग एवं रणनीतिक प्रचार के लिए भी एजेंसी चयन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।
राज्य के प्रमुख प्राकृतिक एवं ईको-टूरिज्म स्थलों, जैसे राजगीर, कैमूर, रोहतास, गया, वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष्य तथा अन्य वन एवं जलाशय क्षेत्रों में भी पर्यटकीय सुविधाओं के विकास की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
राजगीर में ईको-फ्रेंडली कॉटेज तथा नेचर सफारी में क्लिफ वॉक जैसी सुविधाओं के विकास की प्रक्रियाएँ भी चल रही हैं।
विभाग का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन कायम करते हुए स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर सृजित करना तथा बिहार के प्राकृतिक स्थलों को पर्यावरण-अनुकूल एवं गुणवत्तापूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित