, Aug. 30 -- अब तक योजना का लाभ निर्धारित श्रेणियों की महिला अभ्यर्थियों तक सीमित था। इसके कारण सामान्य वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और पिछड़ा वर्ग की कई ऐसी अभ्यर्थियां, जिन्होंने कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की, प्रोत्साहन राशि से बाहर रह जाती थीं। योजना के प्रस्तावित विस्तार के बाद पात्रता की निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली सभी वर्गों की महिला अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिल सकेगा।योजना के विस्तार में केवल यूपीएससी और बीपीएससी ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। विभाग के अनुसार, आईईएस, भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय सांख्यिकी सेवा, कंबाइंड जियो-साइंटिस्ट सहित निर्धारित यूपीएससी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली महिला अभ्यर्थियों को 75 हजार से एक लाख रुपये तक की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

इसी तरह सीडीएस, एनडीए, सीबीआई तथा अन्य राज्यों की राज्य सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाली अभ्यर्थियों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान किया जा रहा है। वहीं, रिजर्व बैंक ग्रेड-बी, एसबीआई सीजीएल तथा निर्धारित रेलवे भर्ती परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने पर 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव है।

योजना को व्यापक बनाने के लिए केंद्रीय कर्मचारी चयन आयोग, विभिन्न राज्य सेवा आयोगों, बैंकिंग सेवा भर्ती संस्थाओं, भारतीय जीवन बीमा निगम और विभिन्न रेलवे भर्ती बोर्डों की निर्धारित प्रतियोगी परीक्षाओं को भी दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव है। इससे सिविल सेवा के साथ-साथ बैंकिंग, रेलवे, रक्षा और अन्य सरकारी सेवाओं में करियर बनाने की तैयारी कर रही बेटियों को भी आर्थिक सहायता का रास्ता खुलेगा।

सरकार का जोर आर्थिक स्थिति के कारण प्रतिभाशाली महिला अभ्यर्थियों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित न होने देने पर है। प्रारंभिक परीक्षा में सफलता के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से कोचिंग, अध्ययन सामग्री, परीक्षा शुल्क और अन्य तैयारी संबंधी खर्चों में सहायता मिल सकेगी। योजना का विस्तार होने से बिहार की अधिक से अधिक बेटियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के बाद अगले चरण की तैयारी के लिए समान अवसर मिल सकेगा।

समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बिहार की बेटियों को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराना है। प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली महिला अभ्यर्थियों को आर्थिक सहायता देने से उन्हें आगे की तैयारी में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि योजना का दायरा सभी वर्गों की महिला अभ्यर्थियों तक बढ़ाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिभा और मेहनत के रास्ते में आर्थिक स्थिति बाधा न बने। सरकार चाहती है कि बिहार की अधिक से अधिक बेटियां प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर प्रशासनिक, बैंकिंग, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में अपना भविष्य बनाएं और राज्य का नाम रोशन करें।

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