, April 25 -- अध्यक्षीय संबोधन में मां जानकी को मिथिला के संस्कार और संस्कृति में जीवंत देवी बताते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो शशि नाथ झा ने कहा कि उनके जैसा उदात्त चरित्र संपूर्ण विश्व के इतिहास में मिलना असंभव है। मां जानकी को मैथिल संस्कृति की धरोहर बताते हुए कहा कि जानकी के प्रति सम्मान का भाव सिर्फ मिथिला के लोगों में ही नहीं, बाहर के लोगों के हृदय में भी धड़कता है। वर्तमान संदर्भ में भी उनके जीवन चरित्र की व्यापकता समाज के लिए अनुकरणीय है और उनका पूरा जीवन आज भी मिथिला की धिया के बीच आदर्श बना हुआ है।

आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि मां जानकी मिथिला के लोगों के रंग-रग में बसी हुई है। लेकिन यह सबसे बड़ी त्रासदी है कि मिथिला के लोगों को आज भी मां जानकी की तरह कदम-कदम पर अग्निपरीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है।

मौके पर संस्थान की ओर से प्रस्ताव रखते हुए मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमला कांत झा ने जनहित में यूजीसी बिल को वापस लिए जाने एवं बिहार गौरव गीत में मिथिला को शामिल किए जाने सहित लोक उत्सव में बाहरी कलाकारों को थोपने की बजाय स्थानीय कलाकारों को विशेष अवसर दिए जाने की ओर सभी का ध्यान केंद्रित किया। सभागार में उपस्थित लोगों ने करतल ध्वनि से इस प्रस्ताव का स्वागत किया।मौके पर डॉ. चन्द्रमणि झा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित पुस्तक ' द लीडरः नरेंद्र डी. मोदी' का विमोचन भी किया गया।

संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सुषमा झा, अनुपमा मिश्र, डॉ. ममता ठाकुर, चन्द्रमणि झा, रामसेवक ठाकुर, केदारनाथ कुमर आदि ने गीत-संगीत के स्वर लहरियों की छटा जमकर बिखेरी। उद्घाटन सत्र मे धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अनिल कुमार झा ने किया।

कार्यक्रम अंतर्गत डा सुषमा झा के संयोजन में आयोजित जानकी सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। रेणु चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में जानकी नवमी को वृहत पैमाने पर घर घर मनाने पर रोहिणी झा ने उपयोगी विचार रखे। डॉ. ममता ठाकुर, वंदना चौधरी, ऋतु प्रज्ञा, मंजू ठाकुर, रूपा आदि ने जानकी पर केंद्रित अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ किया। मौके पर क्रमशः डा ममता कुमारी, अनुपमा मिश्र, डा सुषमा कुमारी एवं रिया चौधरी को जानकी सम्मान से एवं मन्नु चौधरी को मैथिली गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।

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