, Sept. 1 -- मांझर कुंड में रक्षाबंधन या सावन पूर्णिमा के बाद आने वाले पहले रविवार को मेला लगने की परंपरा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इस वर्ष भी सावन पूर्णिमा के बाद पहले रविवार को मांझर कुंड श्रद्धालुओं और सैलानियों से गुलजार रहा। सिख समुदाय के लोगों ने विशेष पूजा-अर्चना की। श्रद्धालु शनिवार की रात से ही यहां पहुंचने लगे थे। इस दौरान शबद-कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने जलधारा में स्नान किया और प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताया।हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु के बाग से पहाड़ मेले की यात्रा निकाली गई। यात्रा में शामिल श्रद्धालु धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंझर कुंड पहुंचे।
गुरु बाग के प्रबंधक सह अध्यक्ष महंत बजरंगी दास ने बताया कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष भी श्रद्धालु मांझर कुंड पहुंचे हैं। यहां पूजा-पाठ और प्रार्थना के माध्यम से देश, राज्य और समाज की प्रगति तथा आपसी भाईचारे की कामना की। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश भी देता है।
इस ऐतिहासिक मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। तभी इस वर्ष मेले से कुछ दिन पहले रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने सासाराम की कैमूर पहाड़ियों में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मंझर कुंड में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए।
मांझर कुंड और धुआं कुंड बिहार के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में भी शामिल हैं। मानसून के दौरान पहाड़ियों से गिरता पानी, चारों ओर फैली हरियाली और ताजगी भरा वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह इलाका पिकनिक और प्रकृति भ्रमण के लिए भी लोकप्रिय है। परिवारों, युवाओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए कैमूर की पहाड़ियों के बीच बसे ये जुड़वां झरने बिहार की प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा अनुभव कराते हैं।
आस्था, इतिहास और प्रकृति के इस अद्भुत संगम के कारण मंझर कुंड आज भी रोहतास और बिहार के महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
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