, May 16 -- महिलाओं की सुविधा एवं गरिमा को ध्यान में रखते हुए राज्य की पांच पंचायतों धनरुआ (पटना), मुरौल (मुजफ्फरपुर), दहिपट मधोपुर पूर्वी एवं पश्चिमी (मधुबनी) तथा मधुबन प्रखंड (पूर्वी चंपारण) में पंचायत भवनों के भीतर "ब्रेस्टफीडिंग रूम" (स्तनपान कक्ष) का निर्माण कराया गया है। इन कक्षों का उद्देश्य पंचायत भवनों में आने वाली गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं निजी स्थान उपलब्ध कराना है। यह पहल पंचायत भवनों को वास्तव में महिला अनुकूल सार्वजनिक स्थानों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस पहल के अंतर्गत महिलाओं को परामर्श, कानूनी जानकारी एवं आवश्यकतानुसार पुलिस, वन स्टॉप सेंटर, दीदी अधिकार केंद्र एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जैसी संस्थाओं से जोड़ा जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों एवं जीविका दीदियों की सक्रियता के कारण महिलाओं में सहायता मांगने एवं न्याय प्राप्त करने का आत्मविश्वास बढ़ा है। कई पंचायतों में महिलाओं ने पहली बार खुलकर घरेलू हिंसा एवं सामाजिक भेदभाव जैसे मुद्दों को पंचायत स्तर पर उठाना शुरू किया है।

महिला हितैषी पंचायतों में बाल विवाह रोकथाम को लेकर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका दीदियों एवं किशोरी समूहों की सतर्कता से कई बाल विवाह रोके गए हैं। इसके साथ ही "होली सुरक्षा अभियान" जैसे विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं एवं किशोरियों की सुरक्षा एवं सम्मान के प्रति समुदाय को संवेदनशील बनाया जा रहा है। पंचायतों में रैली, शपथ अभियान, विद्यालय आधारित गतिविधियां एवं जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

महिला हितैषी ग्राम पंचायत पहल का प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, किशोरियां शिक्षा से जुड़ रही हैं, सार्वजनिक स्थल अधिक सुरक्षित बन रहे हैं तथा महिलाएं पंचायत को अपने अधिकार एवं न्याय के मंच के रूप में देखने लगी हैं। पंचायती राज विभाग की यह पहल सहभागी, संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण ग्रामीण शासन की दिशा में एक नई पहचान बनती जा रही है।"महिला हितैषी ग्राम पंचायत" आज बिहार में समावेशी, संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण ग्रामीण शासन की नई पहचान बनती जा रही है।

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