, March 12 -- मुख्य अतिथि के रूप मे जीविका, दरभंगा की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. ऋचा गार्गी ने जीविका का विस्तार से परिचय एवं महत्त्व बताते हुए कहा कि जीविका दीदी ने 10 रुपए से एक लाख तक का सफर किया है। आज इनकी बदौलत गांव में न केवल पढ़ाई, खान-पान, शौचालयों का उपयोग आदि में सामाजिक परिवर्तन दिख रहा है, बल्कि बाल विवाह एवं दहेज प्रथा आदि में भी काफी कमी आयी है। जीविका के माध्यम से गांव की महिलाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि जीविका पूरी तरह महिलाओं का संगठन है, जिसका सफर 14 वर्षों का है। पिछले तीन वर्षों में जीविका दीदी पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन बना रही है, नर्सरी चलाकर पौधे उपलब्ध करा रही हैं। इससे जुड़कर महिलाएं उद्यमी भी बन रही हैं।
सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रो. शाहिद हसन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे विश्वविद्यालय में छात्राएं अधिक संख्या में नामांकन ले रही हैं जो महिला सशक्तिकरण का एक प्रमाण है। यह दिवस सभी महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एवं समानता के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रोग्रेसिव कुलपति के कुशल नेतृत्व में हमारा विश्वविद्यालय तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां स्तरीय पढ़ाई के साथ ही बेहतर शोध भी हो रहा है।
स्वागत संबोधन में गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष सह कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी हांसदा ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छात्राएं शिक्षा प्राप्त करें, आत्मविश्वास से अपने अंदर बदलाव लाएं और मजबूती से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जल्द ही हमारा जीविका से एमओयू भी साइन होने वाला है, जिससे हम महिला विकास के लिये अधिक से अधिक कार्य कर सकें।
समारोह को जीविका से आये पूनम झा, मनोरमा कुमारी, स्मिता कुमारी, नरेश कुमार तथा राहुल कुमार आदि ने भी रिसोर्स पर्सन के रूप में संबोधित किया।समारोह का संचालन विभागीय प्राध्यापिका डॉ. प्रगति ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्राची मारवाह ने किया।
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