, May 27 -- मंत्री ने कहा कि ऐसी पंचायतों की संख्या इस समयावधि में घटकर 1270 से 1158 हो गई। इसी तरह 20-30 फीट भूजल स्तर वाली पंचायतों की संख्या भी कम होकर 2529 से 2213 हो गई हैं। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर में बढ़ोतरी के कई कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन इसके प्रमुख कारणों में जल- जीवन-हरियाली कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन, लोगों में जागरुकता समेत ऐसे कारण प्रमुख हैं।

मंत्री ने कहा कि राज्य में हीटवेव को देखते हुए खास प्लान तैयार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 475 वाटर टैंकर, 15 वाटर एटीएम और 15 जलदूत की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बंद पड़े 86 हजार चापाकलों को ठीक करने का अभियान पूरे राज्य में तेजी से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दक्षिण बिहार में आपदा प्रबंधन विभाग से मिली राशि के आधार पर एक हजार नए चापाकलों को लगा दिया गया है। सालाना औसतन पांच हजार चापाकल पूरे राज्य में लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पीएचईडी के स्तर से खराब काम करने वाले ठेकेदारों पर भी कार्रवाई की जा रही है। अब तक 468 ठेकेदारों को डीबार और 25 को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग से 87 हजार 160 योजनाएं ट्रांसफर होकर पीएचईडी को मिली हैं। इनमें कई योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। इसे भी ठीक करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्तर पर भीषण गर्मी को देखते हुए आपदा प्रबंधन कमेटी की बैठक में नल से जल की सप्लाइ के समय में एक घंटे की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी पूरे वर्ष के लिए लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि अक्टूबर से मार्च के बीच सुबह छह बजे से दस बजे तक और अप्रैल से सितंबर के बीच सुबह पांच बजे से नौ बजे तक पानी का सप्लाई किया जाएगा। इसके अलावा वर्षभर शाम को पानी की सप्लाई अभी संध्या चार से छह बजे तक होती थी। इसकी समय सीमा में तब्दील करते हुए शाम चार बजे से सात बजे तक कर दी गई है।

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