, Nov. 1 -- समापन समारोह के बाद संघ की आम बैठक वर्तमान अध्यक्ष प्रो. प्रदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें नई कार्यकारी समिति का गठन किया गया तथा 2027 में मगध विश्वविद्यालय, गया में 28वां अधिवेशन आयोजित करने का निर्णय लिया गया। अगले अधिवेशन के संयोजक प्रो. वासुदेव प्रसाद सिंह होंगे। नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रो. राम प्रवेश यादव ने संघ के मूल उद्देश्यों को पूरा करने के लिए समग्र प्रयास करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने मिथिला की पवित्र भूमि पर विद्वानों के बीच आने को अपना सौभाग्य बताया।सम्मेलन के संयोजक डॉ. अनुरंजन ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन में आयोजित समानांतर तकनीकी सत्रों में 15 से अधिक राज्यों के 500 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर युवा शोधार्थियों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2026 के गोन्तिया यंग ज्योग्राफर्स अवार्ड के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार, गया की डॉ. पूर्णिमा को प्रथम तथा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के अभिषेक आकर्ष को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं, डॉ. विद्यासागर इमर्जिंग ज्योग्राफर्स अवार्ड में पटना विश्वविद्यालय के सुमन कुमार को प्रथम तथा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार की वैष्णवी स्वामी को द्वितीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। सभी चयनित प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिह्न एवं पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।इससे पूर्व पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विनय नाथ झा की अध्यक्षता में पैनल परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें पर्यावरणविद् एवं एमएलएसएम कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. विद्यानाथ झा ने मखाना की खेती एवं उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मखाना औषधीय एवं पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण सुपर फूड है। इसकी खेती के साथ जलाशयों में गरई, मांगुर जैसी मछलियों का पालन भी किया जा सकता है। मखाना प्रोटीन युक्त एवं मधुमेह नियंत्रण की दृष्टि से उपयोगी खाद्य पदार्थ है, जिसकी देश-विदेश में मांग है। उन्होंने मखाना के अवशेषों के उपयोग से मछली पालन की संभावनाओं की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वैश्विक तापवृद्धि के दौर में जलाशय आधारित कृषि, मखाना एवं सिंघाड़ा की खेती पर पड़ने वाले प्रभावों का समाधान खोजना जरूरी है।
राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्राध्यापक प्रो. रत्नेश कुमार झा ने कृषि क्षेत्र में देश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार में मौसम के अप्रत्याशित व्यवहार को देखते हुए स्मार्ट खेती, कृषि विविधीकरण एवं नई तकनीकों को अपनाने की विशेष जरूरत है। उन्होंने कहा कि खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का प्रयोग नुकसानदेह है। किसानों को जैविक खेती एवं स्मार्ट कृषि पद्धतियों की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि कम उर्वरकों के उपयोग से भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
समारोह में संघ के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. प्रदीप सिंह, नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रो. राम प्रवेश यादव, महासचिव प्रो. मनोज कुमार सिंह सहित अन्य शिक्षाविदों ने विचार व्यक्त किए। अतिथियों को पाग, चादर, मिथिला पेंटिंग एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. मनोज कुमार सिन्हा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुरंजन ने किया। आयोजन में भूगोल विभाग के प्राध्यापक डॉ. मनु राज शर्मा, डॉ. रश्मि शिखा, डॉ. सुनील कुमार सिंह, डॉ. रानी सिंह, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं स्थानीय शिक्षकों ने सक्रिय सहयोग किया। राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
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