, May 14 -- डॉ. प्रियंका राय ने कहा कि वेदकालीन समाज आज भी प्रेरणास्रोत है तथा नारियों को उनकी आंतरिक शक्ति का बोध कराना आवश्यक है।
विषय प्रवेश कराते हुए डॉ. आर.एन. चौरसिया ने कहा कि वैदिक नारी शिक्षा, स्वतंत्रता एवं आध्यात्मिक उन्नति के उच्च शिखर पर थीं। उन्हें ज्ञान, धर्म एवं सामाजिक निर्णयों में समान अधिकार प्राप्त था। उन्होंने कहा कि नारी केवल गृहिणी नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार एवं परंपरा की वाहिका हैं।
डॉ. शिवानन्द झा ने कहा कि नारी वैदिक काल से ही पूजनीय रही हैं और भविष्य में भी उनकी महत्ता बनी रहेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण कान्त झा ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वैदिक नारी शिक्षित, स्वाधीन एवं समाज की मार्गदर्शिका थीं। आज आवश्यकता है कि वैदिक आदर्शों से प्रेरणा लेकर नारी-सम्मान, शिक्षा, स्वतंत्रता एवं समानता की भावना को पुनः सुदृढ़ किया जाए।
कार्यक्रम में डॉ. राजीव कुमार, फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा, प्रो अरुण कुमार कर्ण, डॉ संजीव कुमार साह, डॉ प्रवीण कुमार, डॉ विजय कुमार मिश्र सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित थे। सभी प्रतिभागियों को फाउंडेशन की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वैदिक मंगलाचरण से हुआ। वैदिक मंगलाचरण डॉ विजय कुमार मिश्र ने प्रस्तुत किया, जबकि कुमकुम कुमारी ने नारी विषयक स्वरचित कविता का पाठ किया। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर एवं पुष्प-पौधों से किया गया। कार्यक्रम का संचालन जिग्नेश कुमार ने किया। स्वागत भाषण डॉ ममता स्नेही एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मोना शर्मा ने किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित