, April 24 -- इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती बंदना प्रेयशी ने पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पोषण पखवाड़ा के दौरान बनी गति को अभियान के बाद भी बनाए रखना जरूरी है। उन्होने कहा कि इस पहल ने जमीनी स्तर पर पोषण और प्रारंभिक बचपन विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। आंगनवाड़ी केंद्र अब धीरे-धीरे प्रारंभिक शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं, जिन्हें बेहतर व्यवस्था, मजबूत आधारभूत संरचना और बच्चों में विकासात्मक विलंब की समय पर पहचान पर बढ़ते जोर से और सुदृढ़ किया जा रहा है।

यूनिसेफ बिहार की प्रमुख सुश्री मोनिका नीलसन ने राज्य सरकार को सशक्त नेतृत्व और प्रारंभिक बाल विकास (ईसीडी) के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "बिहार जैसे राज्य में, जहां छह वर्ष से कम आयु के लगभग दो करोड़ बच्चे हैं, प्रारंभिक बाल विकास में निवेश केवल सामाजिक प्राथमिकता ही नहीं, बल्कि मानव पूंजी और दीर्घकालिक विकास के लिए एक रणनीतिक निवेश भी है।" उन्होंने बताया कि यूनिसेफ अररिया और पूर्णिया जैसे जिलों में 'नवचेतना' कार्यक्रम के तहत ईसीडी के क्रियान्वयन में सहयोग कर रहा है और इन अनुभवों को पायलट के रूप में नहीं, बल्कि प्रणाली सुदृढ़ीकरण के व्यावहारिक मॉडल के रूप में सरकार के साथ साझा किया जाता है।

आईसीडीएस के निदेशक योगेंद्र सागर ने पने स्वागत संबोधन में जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की क्षमता निर्माण के साथ-साथ साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों को सभी जिलों में विस्तार देने पर विशेष ध्यान दे रही है।उन्होंने बताया कि यूनिसेफ के सहयोग से 'दिव्यांगता स्क्रीनिंग शेड्यूल' लागू किए जाने के बाद राज्य में बच्चों में विकासात्मक विलंब की प्रारंभिक पहचान की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इस दिशा में सक्षम बनाना प्राथमिकता है, जिससे हर बच्चे में समय रहते विकासात्मक देरी की पहचान हो सके और उसे समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण 'डिसएबिलिटी स्क्रीनिंग शेड्यूल (डीएसएस)' का परिचय रहा, जो एक मानकीकृत उपकरण है और अब बिहार के विस्तृत आईसीडीएस नेटवर्क में बच्चों में विकासात्मक समस्याओं की पहचान तथा समय पर रेफरल सुनिश्चित करने के लिए उपयोग किया जाएगा।

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