, May 21 -- उल्लेखनीय है कि विभाग की ओर से 20 और 21 मई को विशेष अभियान चलाते हुए कुल 68 स्थानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान कुल 34 बाल एवं किशोर श्रमिकों को मुक्त कराया गया तथा 15 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। अभियान का नेतृत्व श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी श्री लौकेश कुमार झा ने किया। श्रम अधीक्षक विजय कुमार ठाकुर ने बताया कि किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान में बाल श्रमिकों से काम कराना कानूनन अपराध है। इसके तहत दोषी नियोजकों पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना तथा दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के एमसी मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार मामले में दिए गए आदेश के अनुसार प्रत्येक बाल श्रमिक पर अलग से 20 हजार रुपये की वसूली भी की जाएगी, जिसे जिला बाल श्रमिक पुनर्वास-सह-कल्याण कोष में जमा कराया जाएगा।
धावादल में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी विभेश कुमार सिंह, भीम कुमार, प्रयास संस्था के कन्हैया कुमार, चाइल्ड लाइन, ग्राम नियोजन केंद्र तथा गोपालपुर थाना की टीम भी शामिल रही। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और बाल श्रमिक रखने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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