, June 4 -- रोहतास जिले के एक गांव में 15 वर्षीय एक किशोरी की शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। परिवार रस्मों में व्यस्त था, लेकिन लड़की के मन में पढ़ाई छूट जाने का डर था। उसी समय बाल विवाह की सूचना गांव की महिला जनप्रतिनिधियों और जीविका समूह तक पहुंची। मुखिया, वार्ड सदस्य, जीविका दीदियां और स्थानीय कार्यकर्ता तुरंत सक्रिय हो गए। परिवार के साथ लगातार बातचीत, काउंसलिंग और कानूनी-सामाजिक जागरूकता के बाद विवाह टल गया। आज वह किशोरी स्कूल जा रही है और अपने सपनों को आगे बढ़ा रही है। नालंदा जिले के राजगीर प्रखंड के लोदीपुर गांव में 16 वर्षीय सोनी कुमारी की शादी तय हो चुकी थी। वार्ड सदस्य संजू कुमारी को सूचना मिलते ही उन्होंने परिवार के साथ लगातार काउंसलिंग सत्र शुरू किए। जीविका की सक्षमा दीदी और सीएम दीदी भी साथ आईं। परिवार को शिक्षा की अहमियत समझाई गई। नतीजा सोनी आज 10वीं पास कर आगे पढ़ रही है।

मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड के पोखरेरा गांव में 15 वर्षीय नंदनी कुमारी की शादी परिवार जल्द कराना चाहता था। वार्ड सदस्य मीना देवी ने मां को समझाया कि बेटी को शिक्षा और अच्छे भविष्य का हक है। इसी प्रखंड के बहिलवाड़ा रूपनाथ उत्तरी गांव में 15 वर्षीय सोनम कुमारी पर भी गरीबी के कारण शादी का दबाव था। यहां वार्ड सदस्य फूलकुमारी देवी और जीविका समूह ने मोर्चा संभाला। दोनों लड़कियां अब पढ़ाई पूरी कर रही हैं।

मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड के सिरिपुर हाटी उत्तरी गांव में 17 वर्षीय सुधा कुमारी और बिरौल गांव की 17 वर्षीय रेखा कुमारी दोनों पर आर्थिक दबाव या अच्छे रिश्ते के नाम पर शादी का बोझ डाला जा रहा था। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने दोनों परिवारों को जागरूक किया। आज सुधा घर के कामों के साथ पढ़ाई जारी रखे हुए है और रेखा नानी के यहां सुरक्षित रहकर शिक्षा पूरी कर रही है।

राजधानी पटना के धनरुआ प्रखंड में 14 वर्षीय सुनीता कुमारी (बदला हुआ नाम) को गरीबी और संकीर्ण सोच के कारण शादी के मंडप में धकेला जा रहा था। सरपंच रिंकू देवी और मुखिया रानी कुमारी के हस्तक्षेप और परिवार के साथ की गई बातचीत से बाल विवाह रुक गया। सुनीता अब निश्चिंत होकर स्कूल जा रही है।

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