, July 26 -- पटवारा दक्षिणी पंचायत निवासी काजल और आंचल ने पहले कभी विद्यालय नहीं देखा था। आर्थिक स्थिति के कारण आवश्यक दस्तावेजों का अभाव उनके नामांकन में बड़ी बाधा थी। सभी के सहयोग से दोनों बहनों के आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए गए और पहली बार विद्यालय में उनका नामांकन सुनिश्चित हुआ।नालंदा जिले के राजगीर प्रखंड की लोदीपुर पंचायत निवासी सुगंधा कुमारी धीरे-धीरे विद्यालय से दूर हो गई थी। सामूहिक प्रयास से वह पुन शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ी। आज सुगंधा केवल स्वयं पढ़ाई नहीं कर रही है, बल्कि किशोरी समूह की सक्रिय सदस्य के रूप में दूसरी बालिकाओं को भी विद्यालय जाने और बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता फैलाने में भी सहयोग कर रही है।

पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार पंचायतों को समग्र ग्रामीण विकास और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बना रही है। पंचायतें केवल आधारभूत संरचना के निर्माण की इकाइयां नहीं हैं।

मंत्री ने कहा कि किसी भी बालिका की पढ़ाई गरीबी, असुरक्षा, सामाजिक रुढीवादिता या किताबों की कमी के कारण नहीं रुकनी चाहिए। सभी का समन्वित प्रयास बाल हितैषी एवं महिला हितैषी पंचायतों की परिकल्पना को साकार कर रहा है। प्रत्येक बेटी की विद्यालय में वापसी पूरे समाज की सफलता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित