, Aug. 12 -- कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री नन्द किशोर राम ने कहा कि बिहार के ग्रामीण जीवन में बकरीपालन का विशेष महत्व है। कम पूँजी एवं सीमित संसाधनों में बकरीपालन संभव होने के कारण यह विशेषकर छोटे एवं सीमांत पशुपालक परिवारों तथा ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम है।उन्होंने कहा कि गाँवों में लंबे समय से बकरी को "गरीब की गाय" कहा जाता रहा है, लेकिन सरकार की सोच अब बकरीपालन को केवल आकस्मिक आवश्यकता के समय बकरी बेचकर धन प्राप्त करने की व्यवस्था तक सीमित रखने की नहीं है। मंत्री ने कहा, "सरकार चाहती है कि बकरी हमारे पशुपालकों के लिए केवल जरूरत के समय बिकने वाली संपत्ति न रहे, बल्कि नियमित आमदनी देने वाली आर्थिक संपत्ति बने। बकरी के दूध का संगठित संग्रहण एवं विपणन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है।"उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना तथा किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाना है। बिहार में कॉम्फेड ने गाय एवं भैंस के दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन का एक सफल सहकारी मॉडल स्थापित किया है। अब इसी संस्थागत क्षमता का लाभ बकरीपालकों तक पहुँचाने की दिशा में पहल की जा रही है।

मंत्री ने कहा कि यदि गाँव में उत्पादित बकरी के दूध को निकटस्थ संग्रहण व्यवस्था से जोड़कर बाजार उपलब्ध कराया जाता है, तो पशुपालक को स्वयं ग्राहक तलाशने की आवश्यकता नहीं होगी। "सरकार की कोशिश ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसमें पशुपालक अच्छा और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करे तथा व्यवस्था उसके उत्पाद को बाजार से जोड़े।"उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि बकरीपालन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। इसलिए बकरी के दूध से नियमित आय की व्यवस्था महिला आर्थिक सशक्तीकरण का भी प्रभावी माध्यम बन सकती है।

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