, June 3 -- सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक श्रीमती रूबी ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं बच्चों की कल्पनाशीलता, सृजनशीलता एवं रचनात्मक सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि कला के माध्यम से बच्चे अपनी अभिव्यक्ति को नया आयाम देते हैं तथा उनमें नवाचार और आत्मविश्वास का विकास होता है। 03 जून से 10 जून तक आयोजित होने वाली इस कार्यशाला में 08 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों एवं किशोरों को पेपर मेशी, वेस्ट मेटेरियल क्राफ्ट तथा टेराकोटा जैसी कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को अनुपयोगी वस्तुओं के रचनात्मक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण तथा 'वेस्ट टू बेस्ट' की अवधारणा से भी अवगत कराया जाएगा।
कार्यशाला प्रतिदिन पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक बिहार ललित कला अकादमी के बहुद्देशीय सांस्कृतिक परिसर में संचालित की जाएगी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों को आवश्यक कला सामग्री एवं अल्पाहार निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में बिहार ललित कला अकादमी की सचिव श्रीमती अमृता प्रीतम ने सभी अतिथियों, कलाकारों, प्रशिक्षकों, अभिभावकों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं मंच का संचालन श्रीमती सोमा चक्रवर्ती द्वारा किया गया।
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