, March 16 -- प्रदर्शनी में 36 विषयों पर केंद्रित 72 पांडुलिपियों के डिजिटल अभिलेख प्रदर्शित किए गए हैं। इन पांडुलिपियों में विषयों की विविधता, सुलेख तथा चित्रांकन दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित करते हैं।इसके अतिरिक्त प्रदर्शनी में बिहार के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख भी प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें बाबू कुंवर सिंह तथा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित दस्तावेज़ प्रमुख हैं। इनमें 1852 से 1856 के बीच कुंवर सिंह द्वारा लिखे गए महत्वपूर्ण पत्र, प्रशासनिक पत्राचार, टेलीग्राम तथा विद्रोह से संबंधित न्यायिक एवं प्रशासनिक अभिलेख शामिल हैं।
प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण डुमरांव एवं बक्सर के राजाओं तथा बाबू कुंवर सिंह के परिवार का वंशावली चार्ट भी है। इसके साथ ही 1858 में शाहाबाद के कलेक्टर द्वारा पटना प्रमंडल के कमिश्नर को भेजा गया एक महत्वपूर्ण पत्र भी प्रदर्शित किया गया है, जिसमें कुंवर सिंह एवं अमर सिंह की संपत्तियों तथा डुमरांव राज, बक्सर और जगदीशपुर परिवार के इतिहास का उल्लेख है।इसके अतिरिक्त प्रदर्शनी में परगना भागलपुर की 'एकबंदी टोडरमल' जैसे महत्वपूर्ण अभिलेख भी प्रदर्शित किए गए हैं, जो तत्कालीन राजस्व प्रशासन की व्यवस्था को दर्शाते हैं।
इस प्रदर्शनी में जे.डी. विमेन्स कॉलेज, पटना की बड़ी संख्या में छात्राएँ भी शामिल हुईं, जिन्होंने प्रदर्शित पांडुलिपियों एवं अभिलेखों के माध्यम से बिहार की समृद्ध बौद्धिक एवं ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानकारी प्राप्त की।
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