, Aug. 24 -- पुस्तक का विश्लेषण करते हुए प्रख्यात कथा लेखिका और कवयित्री गीताश्री ने कहा कि इस संग्रहालय की कविताएं सुख दुख की अविरल धारा से भरी पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि स्त्री का दुख और उसका आंतरिक संसार पुरुषों से अलग होता है और उन्हीं अनुभूतियों की झलक इस संग्रह में मिलती हैं।नामवर कवि अरुण कमल ने कहा कि कविता के क्षेत्र में स्त्रियां पहले बहुत कम थीं, लेकिन आज 300 से ज्यादा प्रबुद्ध महिलाएं इस विधा पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक आजादी ने स्त्रियों की रचनात्मकता को नया आयाम दिया। श्री कमल ने लोकार्पित संग्रह की कविता 'हिसाब' का पाठ भी किया।
कवियत्री पूनम सिंह ने कहा कि स्त्री देह तक तो हर पुरूष पहुंचना चाहता है, लेकिन अंतर्मन तक बिरले ही पहुंच पाते हैं। इस संग्रह में उंस अनुभूति के दर्शन होते हैं।
इस अवसर पर मशहूर साहित्यकार शिव दयाल, भावना शेखर, कुमार वरुण, निवेदिता, सुनीता गुप्ता, उपस्थिति थे। मंच संचालन लेखिका सुमेधा पाठक एवं रंजीता तिवारी ने किया।
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