, Sept. 23 -- श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था भी की गई है, ताकि मेला क्षेत्र एवं आसपास के प्रमुख स्थलों तक आने-जाने में उन्हें सुविधा मिल सके।मेला परिसर में पुलिस शिविर स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। मेला क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सतत निगरानी रखी जा रही है। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा एवं किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक बल एवं पदाधिकारियों को सक्रिय रखा गया है।

किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटने के लिए आपदा प्रबंधन एवं क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) की टीमों की भी तैनाती की गई है।

श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य एवं आकस्मिक चिकित्सा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मेडिकल टीम को 24 घंटे तैनात रखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

जिलााधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मेला क्षेत्र में पेयजल, शौचालय एवं साफ-सफाई की व्यवस्था अनवरत रूप से सुनिश्चित की जाए। मेला परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित निगरानी करने का भी निर्देश दिया गया है।उन्होंने मेला अवधि में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा मेला क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया है, जिससे रात के समय भी श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

श्रद्धालुओं को आवश्यक जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराने के लिए मेला क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों पर हेल्प डेस्क एवं सहायता शिविर की व्यवस्था की गई है। बुजुर्ग श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सहायता के लिए वॉलंटियर एवं व्हीलचेयर की भी व्यवस्था की गई है।

जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित मार्गों एवं सुरक्षित स्नान क्षेत्रों का ही उपयोग करें तथा प्रशासन एवं सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

जिलााधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि पुनपुन अंतर्राष्ट्रीय पितृपक्ष मेला में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी संबंधित पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि श्रद्धालुओं को किसी भी स्तर पर कोई कठिनाई न हो और वे पूजा एवं पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया पूर्ण संतुष्टि एवं सुखद अनुभूति के साथ संपन्न कर मेला परिसर से लौटें। इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी एवं समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

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