, April 24 -- कार्यक्रम का शुभारंभ "पृथ्वी ध्वज" के ध्वजारोहण से हुआ जो संपूर्ण मानव सभ्यता के लिए पृथ्वी के प्रति उत्तरदायित्व, संतुलन एवं संरक्षण का सशक्त संदेश प्रदान करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्नातकोत्तर भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डॉ अनुरंजन ने पर्यावरणीय नैतिकता को केवल अकादमिक अध्ययन का विषय न मानते हुए इसे जीवनशैली एवं नीति-निर्माण का मूल आधार बनाने पर बल दिया।
नेचुरल डेमोक्रेसी के संस्थापक- दार्शनिक डॉ जावेद अब्दुल्लाह ने कहा कि मनुष्य केवल क्रियात्मक नहीं, बल्कि एक विचारात्मक (विचार-निर्माण करने वाला) प्राणी है। इसलिए प्रत्येक परिवर्तन पहले विचार में जन्म लेता है, फिर वह व्यवहार और समाज में आकार लेता है।वहीं नालंदा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव प्रो एम नेहाल ने युवाओं को परिवर्तन का वास्तविक वाहक बताते हुए प्रकृति-केन्द्रित दृष्टिकोण को भविष्य की अनिवार्य वैचारिक दिशा बताया। उन्होने कहा कि पृथ्वी ही एकमात्र जीवित ग्रह है, लेकिन आज इसे खतरा उसके ही निवासियों से है। नेचुरल डेमोक्रेसी ही इसे संतुलित भविष्य की दिशा दे सकती है।
पूर्व कुलपति प्रो. सुरेन्द्र मोहन झा एवं पूर्व कुलसचिव प्रो एम नेहाल ने वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी की शैक्षणिक एवं वैचारिक पहलों के अंतर्गत "वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी यूनिवर्सिटी" एवं यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रीडम" परियोजना की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण भी किया ।
कार्यक्रम के अंतर्गत पौधारोपण कर सतत विकास का संदेश दिया गया। साथ ही छात्र-छात्राओं द्वारा आयोजित चित्रकला, भाषण, निबंध एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया, जिससे पर्यावरण चेतना एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को नई ऊर्जा प्राप्त हुई।
इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉ. रश्मि शिखा, डॉ सुनील कुमार सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अमरजी कुमार, रिज़वान, एहब अब्दुल्लाह तथा निक्कू कुमार की सक्रिय एवं उल्लेखनीय सहभागिता रही। कार्यक्रम का कुशल संचालन ए एन झा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापक डॉ. मनुराज शर्मा ने किया।
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