, Oct. 30 -- जिलाधिकारी ने बताया कि गंगा नदी में हुए भीषण कटाव के कारण जिले में कुल 12 मकान नदी में विलीन हो गए। इनमें 10 पक्के एवं 2 कच्चे मकान शामिल हैं। समीक्षा के दौरान बताया गया कि इन सभी 12 प्रभावित परिवारों के पास अपनी भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रशासन द्वारा कुल 65 डिसमिल भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। संबंधित परिवारों को शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़े सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिये और विशेष रूप से संबंधित वेंडर्स एवं एजेंसियों के लंबित भुगतान का समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा,जिससे किसी प्रकार का भुगतान बैकलॉग शेष नहीं रहे और राहत कार्यों के संचालन में बाधा उत्पन्न न हो।उन्होंने भविष्य में बाढ़ एवं कटाव से होने वाली क्षति को कम करने के उद्देश्य से स्थायी समाधान की दिशा में भी विस्तार से चर्चा की और इसके तहत जिले में स्थायी तटबंधों की मैपिंग कराने, एम्बैंकमेंट्स (तटबंधों) की विस्तृत स्टडी करने तथा जल संसाधन विभाग के अभिलेखों में छूटे हुए बांधों एवं तटबंधों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री मिश्रा ने इस सिलसिले में संबंधित विभागों को उपलब्ध अभिलेखों का सम्यक अध्ययन करते हुए आवश्यक समन्वय स्थापित करने तथा भविष्य में आपदा की स्थिति से निपटने के लिए दीर्घकालिक एवं स्थायी कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में पहल करने को कहा।
साथ ही बाढ़ प्रभावित परिवारों को समयबद्ध राहत उपलब्ध कराने, अनुदान राशि का पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित करने, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास तथा भविष्य में बाढ़ एवं गंगा कटाव से होने वाली क्षति को न्यूनतम करने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित एवं प्रभावी ढंग से कार्य करने पर जोर दिया गया।
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