, Aug. 27 -- समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया कि आपदा के समय सबसे अधिक जोखिम वाले वर्गों गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों तथा गंभीर असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए।स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा एवं एएनएम के माध्यम से बाढ़ संभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग पूरी कर ली गई है। सूची में प्रत्येक गर्भवती महिला की संभावित प्रसव तिथि को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है।
जिन महिलाओं का प्रसव बाढ़ के महीनों के दौरान संभावित है, उन्हें बाढ़ आने से पूर्व ही निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों अथवा सुरक्षित प्रसव गृहों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी। इस कार्य में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आईसीडीएस एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित कर कार्य किया जा रहा है।
बाढ़ के दौरान कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं अथवा टापू जैसे क्षेत्रों में बदल जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों के ग्रामीण कई बार अपने जान-माल, घर एवं मवेशियों की देखभाल के कारण राहत शिविरों में जाने से कतराते हैं। ऐसी स्थिति में प्रभावित लोगों तक उनके निवास स्थल के निकट ही स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए बोट एम्बुलेंस अथवा नौका औषधालय की व्यवस्था की गई है।
इन नौकाओं पर योग्य डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं एवं फर्स्ट-एड किट उपलब्ध रहेंगी। आपदा प्रबंधन विभाग एवं स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से नौकाओं के अधिग्रहण, भाड़ा निर्धारण तथा परिचालन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
इसके अतिरिक्त, राज्य भर के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 102 एम्बुलेंस सेवा को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखने का निर्देश दिया गया है, जिससे गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जा सके।
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