, Sept. 16 -- प्रो. जमाल ने परमाणु राजनीति की चर्चा करते हुए भारत की विश्वसनीय न्यूनतम निवारण क्षमता, परमाणु हथियारों का पहले प्रयोग नहीं करने की नीति तथा जवाबी कार्रवाई के सिद्धांत को रेखांकित किया। उन्होंने भारत, चीन और पाकिस्तान के त्रिकोणीय परमाणु संबंधों को दक्षिण एशियाई सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।प्रो. जमाल ने कहा कि चीन, अमेरिका, रूस और पश्चिम एशिया के साथ भारत के संबंधों को अलग-अलग देखने के बजाय परस्पर जुड़े संदर्भ में समझना आवश्यक है। अमेरिका के साथ भारत का रणनीतिक एवं तकनीकी सहयोग बढ़ा है, जबकि रूस रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। चीन के साथ सीमा विवाद एवं सामरिक प्रतिस्पर्धा चुनौती है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और प्रवासी भारतीयों के कारण महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने की। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों और भारत की विदेश नीति को समझने के लिए ऐसे अकादमिक व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने स्वागत भाषण दिया और विषय को सामयिक बताते हुए भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के गंभीर अध्ययन की आवश्यकता बतायी।
इस अवसर पर डॉ. मनोज कुमार, डॉ. रघुवीर कुमार रंजन, डॉ. नीतू कुमारी सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
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