, May 14 -- राज्यों और सीमाओं के पार संचालित आर्केस्ट्रा समूहों और बच्चों की ट्रैफिकिंग के गहरे गठजोड़ पर जोर देते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा, "भारत बच्चों की ट्रैफिकिंग के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में खड़ा है, लेकिन इस अपराध को समाप्त करने के लिए पूरे समाज और पूरी शासन व्यवस्था को मिलकर काम करना होगा। देशभर में बच्चों को यौन शोषण और ट्रैफिकिंग जैसे उत्पीड़न से सुरक्षित करना जरूरी है। बच्चों को मुक्त कराने और ट्रैफिकिंग गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई में सरकार और पुलिस जो उल्लेखनीय काम कर रही है, उसे अब फास्ट-ट्रैक अदालतों में त्वरित सुनवाई और अदालतों से मुआवजे की रकम जल्द जारी कर मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।"एवीए की टीम की ओर से एक महीने तक की गई गहन पड़ताल के बाद छापे की यह कार्रवाई की गई। टीम ने उन आर्केस्ट्रा समूहों की पहचान की, जहां नाबालिग बच्चियों के होने की आशंका थी। सदस्यों ने ग्राहक बनकर वहां जानकारी जुटाई और कई बार जाकर स्थिति की पुष्टि की। पुष्टि होने के बाद यह सूचना सारण पुलिस के साथ साझा की गई, जिसके आधार पर यह रेस्क्यू अभियान चलाया गया।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, "यह बेहद चिंताजनक है कि संगठित ट्रैफिकिंग नेटवर्क राज्यों और सीमाओं के पार से संचालित आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए बच्चों का शोषण कर रहे हैं। यह कोई अलग-थलग अपराध नहीं, बल्कि मांग, कानूनों पर अमल में ढिलाई और बच्चों की असुरक्षा पर टिका एक संगठित आपराधिक तंत्र है। बिहार पुलिस की हालिया कार्रवाइयां इन अपराधों के प्रति बढ़ती गंभीरता को दिखाती हैं, लेकिन इस तरह के नेटवर्क को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए राज्यों के बीच मजबूत समन्वय, कड़ी निगरानी और शोषण की पूरी श्रृंखला में शामिल हर व्यक्ति की जवाबदेही तय करना जरूरी होगा।"गौरतलब है कि दो दिन पहले गोपालगंज जिले में भी एवीए, नारायणी सेवा संस्थान, पुलिस और एएचटीयू की संयुक्त टीम ने रातभर चले अभियान में 15 आर्केस्ट्रा समूहों से 44 नाबालिग बच्चियों को मुक्त कराया था।

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