, May 10 -- फॉग्सी की स्थानीय अध्यक्ष डॉ. कुमुदिनी झा ने भी इन विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी ही सुरक्षित मातृत्व एवं नवजात संरक्षण की आधारशिला हैं। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. कन्हैया जी झा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नवजात पुनर्जीवन तकनीकों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे जटिल परिस्थितियों में भी नवजातों का जीवन बचाना संभव हुआ है।

एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. हरि दामोदर सिंह ने कहा कि सीज़ेरियन ऑपरेशन के दौरान नवजात की प्रारंभिक देखभाल में एनेस्थेटिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए उन्हें भी इन तकनीकों में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने एवं डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि उन्होंने दशकों पूर्व डॉ. ओम प्रकाश से यह प्रशिक्षण प्राप्त किया था, जो आज भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है।

आईएपी के अध्यक्ष डॉ. के. एन. मिश्रा ने कार्यक्रम में आईएपी की सक्रिय भागीदारी एवं योगदान की सराहना की। वहीं डॉ. रिज़वान ने कहा कि बिहार में नवजात मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है तथा इस प्रकार के प्रशिक्षण अभियानों के माध्यम से भविष्य में इसे एकल अंक तक लाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

डीएमसीएच के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।

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